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King Khāravela and His Dynasty
Rājā Khāravela aura usakā vaṃśa
पाटलिपुत्रीय मौर्यराज्य-शाखा को पुष्यमित्र तक पहुँचाने के बाद ‘हिमवंत थेरावली’ कार ने कलिंग देश के राजवंश का वर्णन दिया है। हाथी गुफा के लेख से कलिंग चक्रवर्ती खारवेल का तो थोड़ा बहुत परिचय विद्वानों को अवश्य मिला है, पर उसके वंश और उनकी संतति के विषय में अभी तक कुछ भी प्रामाणिक निर्णय नहीं हुआ था। हाथी गुफा-लेख के “चेतवसबधनस” इस उल्लेख से कोई-कोई विद्वान् खारवेल को ‘चैत्रवंशीय’ समझते थे तब कोई उसे ‘चेदिवंश’ का राजा कहते थे। हमारे प्रस्तुत थेरावली-कार ने इस विषय को बिलकुल स्पष्ट कर दिया है। थेरावली के लेखानुसार खारवेल न तो ‘चैत्रवंश्य’ था और न ‘चेदिवंश्य’ किन्तु वह ‘चेटवंश्य’ था। क्योंकि वह वैशाली के प्रसिद्ध राजा ‘चेटक’ के पुत्र कलिंगराज ‘शोभनराय’ की वंश-परम्परा में जन्मा था। अजातशत्रु के साथ की लड़ाई में चेटक के मरने पर उसका पुत्र शोभनराय वहाँ से भागकर किस प्रकार कलिंगराजा के पास गया और वह कलिंग का राजा हुआ इत्यादि वृत्तान्त थेरावली के शब्दों में नीचे लिखे देते हैं, विद्वान् गण देखेंगे कि कैसी अपूर्व हकीकत है। “वैशाली का राजा चेटक तीर्थंकर महावीर का उत्कृष्ट श्रमणोपासक था। चम्पानगरी का अधिपति राजा कोणिक-जो कि चेटक का भानजा था- (अन्य श्वेताम्बर जैनसंप्रदाय के ग्रन्थों में कोणिक को चेटक का दोहिता लिखा है) वैशाली पर चढ़ आया और लड़ाई में चेटक को हरा दिया। लड़ाई में हारने के बाद अन्न-जल का त्याग कर राजा चेटक स्वर्गवासी हुआ। चेटक का शोभनराय नाम का एक पुत्र वहाँ से (वैशाली नगरी से) भागकर अपने श्वशुर कलिंगाधिपति ‘सुलोचन’ की शरण में गया। सुलोचन के पुत्र नहीं था इस लिये अपने दामाद शोभनराय को कलिंगदेश का राज्यासन देकर वह परलोकवासी हुआ। भगवान् महावीर के निर्वाण के बाद अठारह वर्ष बीते त
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श्री० मुनि कल्याणविजयजी. "King Khāravela and His Dynasty." अनेकान्त 1 (1930): [page range not recorded].
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