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Ancient Jain Temples of the Tuluva Country
Taulava-deśīya prācīna Jaina-mandira
अनेकांत की दूसरी किरण में मूडबिद्री के 18 मंदिरों में से (1) गुरुबस्ति तथा (2) होसबस्ति नाम के दो प्रधान मंदिरों के बारे में कुछ परिचय दिया गया था, फिर क्रम से लेख देने में मुझे स्वास्थ्याभाव के कारण विलंब हो गया। अतः इस बार शेष मंदिरों का परिचय संक्षेप से दिया जाता हैः- (3) बढगबस्ति – उत्तर दिशा में होने के कारण इस मंदिर को ‘बडगबस्ति’ कहते हैं। यह भी तीन सौ वर्ष पहले का शिलामय मंदिर है। यहाँ पर श्वेत-पाषाणमय खड्गासन तीन फुट ऊँची श्रीचन्द्रप्रभ भगवान् की मूर्ति अतीव मनोज्ञ है। साथ ही, इस मंदिर के अंगण में शिलामय एक मानस्तंभ भी है। (4) शेट्बस्ति – यहाँ धातुमय पद्मासन मूल प्रतिमा श्रीवर्धमान भगवान् की है। इस मंदिर के प्राकार में एक दूसरा मंदिर है जिस में कृष्ण पाषाणमय चौबीस भगवान् की मूर्तियाँ बहुत ही चित्ताकर्षक हैं। इसकी दोनों तरफ शारदा और पद्मावती देवी की मूर्तियाँ विराजमान हैं। इसको यहाँ के पंचों ने बनवाया है। (5) हिरेवस्ति – इस मंदिर में श्रीशांतिनाथ भगवान की मूल प्रतिमा है। मंदिर के प्राकार के अंदर पद्मावती देवी का मंदिर है, जिसमें मृतिका (मिट्टी) से निर्मित चौबीस भगवान् की मूर्तियाँ तथा सरस्वती और पद्मावती की मूर्तियाँ भी बहुत ही मनोज्ञ हैं। इस प्रकार की मृण्मय मूर्तियाँ अन्यत्र कहीं पर देखने में नहीं आई। इसमें कारीगर ने बहुत सुंदर काम किया है। इस मंदिर को “अम्मनवरबस्ति” अर्थात् पद्मावती देवी का मंदिर भी कहते हैं। (6) बेटकेरीबस्ति – यह विशाल मंदिर सजावट के साथ सुंदर है। इसमें श्रीवर्धमान स्वामी की पाँच फुट ऊँची पद्मासन की मनोहर प्रतिमा शिलामय है। इसको भी यहाँ के श्रावकों ने बनवाया था। (7) कोटिबस्ति – इस मंदिर को ‘कोटिश्रेष्ठी’ नामक सेठ ने बनवाया था। यहाँ श्रीनेमिनाथ भगवा
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श्री० पं० लोकनाथजी शास्त्री, मूड़विद्री. "Ancient Jain Temples of the Tuluva Country." अनेकान्त 1 (1930): [page range not recorded].
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