Metaphysicsतत्त्वमीमांसा
भगवान महावीर और उनका समय
Lord Mahāvīra and His Times
Bhagavāna Mahāvīra aura unakā samaya
Loading
Fetching from the archive…
Archaeologyपुरातत्त्व
In Search of Old Records
Purānī bātoṃ kī khoja
(1) प्रभाचन्द्र अकलंक के शिष्य नहीं थे और न समकालीन ‘प्रमेयकमलमार्तण्ड’ और ‘न्यायकुमुदचन्द्र’ के कर्ता प्रभाचन्द्राचार्य की बाबत कहा जाता है कि वे ‘तत्वार्थ-राजवार्तिक’ तथा ‘लघीयस्त्रय’ आदि ग्रंथों के रचयिता भट्टाकलंकदेव के शिष्य थे- अकलंकदेव के चरणों के समीप बैठकर उन्होंने ज्ञान सम्पादन किया था और इसलिये अकलंकदेव उनके विद्यागुरु थे। चुनाँचे सुहृद्वर पं० नाथूरामजी प्रेमी ‘भट्टाकलंकदेव’ नामक अपने निबन्ध में लिखते हैं :- “माणिक्यनन्दि, विद्यानन्द और प्रभाचन्द्र ये तीनों विद्वान् अकलंकदेव के समकालीन हैं। इनमें से प्रभाचन्द्र तो अपने न्यायकुमुदचन्द्रोदय के प्रथम अध्याय में निम्नलिखित श्लोक से यह प्रकट करते हैं कि उन्होंने अकलंकदेव के चरणों के समीप बैठ कर ज्ञान प्राप्त किया था। बोधः कोप्यसमः समस्तविषयं प्राप्याकलङ्कं पदं। जातस्तेन समस्तवस्तुविषयं व्याख्यायते तत्पदं।। किं न श्रीगणभृज्जनेन्द्रपदतः प्राप्तप्रभावः स्वयं। व्याख्यात्यप्रतिमं वचोजिनपतेः सर्वात्मभाषात्मकम्॥” विद्यानन्द-विषयक एक दूसरे लेख में भी आपने इस श्लोक को उद्धृत करते हुए ऐसा ही भाव व्यक्त किया है और साथ ही उसके एक फुटनोट में लिखा है- “प्रभाचन्द्र ने प्रमेयकमलमार्तण्ड के अन्त में निम्न श्लोकों से पद्मनन्दि और रत्ननन्दि को भी अपना गुरु बतलाया है। इससे मालूम होता है कि अकलंक के पास उन्होंने विद्याध्ययन किया होगा और पद्मनन्दि तथा रत्ननन्दि उनके दीक्षागुरु होंगे या उनके पास भी उन्होंने विद्या सीखी होगी।” न्यायतीर्थ पं० गजाधरलालजी ने, ‘तत्वार्थराजवार्तिक’ की प्रस्तावना में भी इस श्लोक को दिया है और प्रेमीजी के कथन का बिलकुल अनुसरण करते हुए इस श्लोक के साथ वाले उनके उक्त ‘माणिक्यनन्दि’ आदि वाक्य का अनुवाद भी संस्कृत में दे
Transcribed from the prepared edition. This is the beginning of the article, not a summary — open the PDF to read it in full.
जुगलकिशोर मुख्तार. "In Search of Old Records." अनेकान्त 1 (1930): 140–152.
Square brackets mark information the archive has not yet recorded. Check the scan before relying on the citation.
Metaphysicsतत्त्वमीमांसा
Lord Mahāvīra and His Times
Bhagavāna Mahāvīra aura unakā samaya
Archaeologyपुरातत्त्व
In Search of Old Records
Purānī bātoṃ kī khoja