Metaphysicsतत्त्वमीमांसा
भगवान महावीर और उनका समय
Lord Mahāvīra and His Times
Bhagavāna Mahāvīra aura unakā samaya
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In Search of Old Records
Purānī bātoṃ kī khoja
जुगलकिशोर मुख्तार (10) उमास्वाति या उमास्वामी? दिगम्बर सम्प्रदाय में तत्त्वार्थसूत्र के कर्त्ता का नाम आजकल आम तौर से ‘उमास्वामी’ प्रचलित हो रहा है। जितने ग्रन्थ और लेख आम तौर से प्रकाशित होते हैं और जिन में किसी न किसी रूप से तत्त्वार्थसूत्र के कर्ता का नामोल्लेख करने की जरूरत पड़ती है उन सब में प्रायः उमास्वामी नाम का ही उल्लेख किया जाता है। बल्कि कभी कभी तो प्रकाशक अथवा सम्पादक जन ‘उमास्वाति’ की जगह ‘उमास्वामी’ या ‘उमास्वामि’ का संशोधन तक कर डालते हैं। तत्त्वार्थसूत्र के जितने संस्करण निकले हैं उन सब में भी ग्रन्थकर्ता का नाम उमास्वामी ही प्रकट किया गया है। प्रत्युत इसके, श्वेताम्बर सम्प्रदाय में ग्रन्थकर्ता का नाम पहले से ही ‘उमास्वाति’ चला आता है और वही इस समय प्रसिद्ध है। अब देखना यह है कि उक्त ग्रन्थकर्ता का नाम वास्तव में उमास्वाति था या उमास्वामी और उसकी उपलब्धि कहाँ से होती है। खोज करने से इस विषय में दिगम्बर साहित्य से जो कुछ मालूम हुआ है उसे पाठकों के अवलोकनार्थ नीचे प्रकट किया जाता है- (1) श्रवणबेलगोल के जितने शिलालेखों में आचार्य महोदय का नाम आया है उन सब में आपका नाम ‘उमास्वाति’ ही दिया है। ‘उमास्वामी’ नाम का उल्लेख किसी शिलालेख में नहीं पाया जाता। उदाहरण के लिए कुछ अवतरण नीचे दिये जाते हैं- अभूदुमास्वातिमुनीश्वरोऽसावाचार्यशब्दोत्तरगृध्रपिञ्छः । - शिलालेख नं० 47 श्रीमानुमास्वातिरयं यतीशस्तत्वार्थसूत्रं प्रकटीचकार । - शि० नं० 105 अभूदुमास्वातिमुनिः पवित्रे वंशे तदीये सकलार्थवेदी । सूत्रीकृतं येन जिनप्रणीतं शास्त्रार्थजानं मुनिपुंगवेन ॥ - शि० नं० 108 इन शिलालेखों में पहला शिलालेख शक संवत 1037 का, दूसरा 1320 का और तीसरा 1355 का लिखा हुआ है। 47वें शिलालेख वाला वाक्
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[author not identified]. "In Search of Old Records." अनेकान्त 1 (1930): [page range not recorded].
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